
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम ग्राहकों को दोषपूर्ण वस्तुओं, लापरवाह सेवाओं और अनुचित व्यापार प्रथाओं से बचाने के लिए कार्य करता है. उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम में छह मुख्य अधिकार शामिल हैं, जिनमें सुरक्षा का अधिकार, चयन का अधिकार, सूचित होने का अधिकार, सुनवाई का अधिकार, निवारण प्राप्त करने का अधिकार, और उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार शामिल हैं

उपभोक्ता संरक्षण कानून देता है ये 6 अधिकार
सुरक्षा का अधिकार (Right to safety): सुरक्षा का अधिकार के तहत ग्राहकों को वैसी चीजों से सुरक्षा का अधिकार है जिनकी जिंदगी को खतरा हो सकता है. इससे किसी वस्तुओं और सेवाओं की बाजारू नीति से जिंदगी या संपत्ति को बचाया जा सकता है.

सूचना का अधिकार (Right to Information)- सूचना का अधिकार के तहत ग्राहक को वस्तुओं की गुणवत्ता, मात्रा, शुद्धता और कीमत के बारे में सही जानकारी पाने का पूरा अधिकार है. ताकी कोई कंपनी उसके साथ जालसाजी नहीं कर सके.

जबरन खरीदारी करवाने के विरूद्ध अधिकार (Right against forcible purchase)- इस एक्ट के तहत ग्राहकों को यह अधिकार है कि वो वस्तुओं और सेवाओं को पसंद नहीं आने पर छांट सकता है. ग्राहकों को अनुकूल चीजें खरीदने का मौका मिलता है.

सुनवाई का अधिकार (Right of hearing)- सुनवाई का अधिकार के तहत ग्राहक को खरीदारी करते समय शोषण के विरूद्ध वो आवाज उठा सकता है. वो अपनी बात फोरम में भी रख सकता है.
ग्राहकों को शिकायत से निपटान का भी अधिकार मिला हुआ है. यानी उसकी किसी भी समस्या को निपटारा हर हाल में किया जाएगा.

