तेरापंथ युवक परिषद द्वारा जप अनुष्ठान का आयोजन

जप से मिलती है शांति – मुनि प्रशांत

कांटाबांजी (वर्धमान जैन): मुनि प्रशांत कुमार जी मुनि कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में तेरापंथ युवक परिषद के आयोजन में सामूहिक जप अनुष्ठान हुआ। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रशांत कुमार जी ने कहा – जैन दर्शन में दो प्रकार की शक्तियां कर्म की एवं आत्मा की मानी गई। कर्म हमारे जीवन को बहुत प्रभावित करते हैं। कर्म के कारण ही जीवन में कष्ट एवं विघ्न आते हैं। आत्मा की शक्ति से कर्म की शक्ति को कमजोर कर सकते हैं।आगम शास्त्रों में कहा गया कि संयम में पराक्रम करना मुश्किल है।तप करने वाले आत्मबल को बढ़ाते हैं। आत्मा की शक्ति को नहीं जगाने से कर्म हावी हो जाता है। संयम की शक्ति, संकल्प की शक्ति बढ़ाने से कर्म की शक्ति क्षीण हो जाती है। कर्म ज्यादा तकलीफ नहीं दे पाते हैं। खाने का संयम करने से शरीर,मन एवं कर्म भी हल्के हो जाते हैं। तप के साथ जप अनुष्ठान होने से हमारी आत्मशक्ति और बढ़ जाती है।वेदनीय, मोहनीय, अन्तराय कर्म क्षीण पड़ते हैं। अनेक प्रकार की विघ्न बाधाएं दूर हो जाती है। मंत्रों की अनेक प्राचीन विद्याएं जैन ग्रंथों में उपलब्ध है। जप आत्मा को उज्ज्वल बनाता है। जप करने से आत्मा को शांति मिलती है। हमारी भावधारा दूसरों को भी प्रभावित करती है। मन के भाव एवं वातावरण का प्रभाव आभामंडल को विशुद्ध बनाता है। आभामंडल के पवित्र रसायन दूसरों को भी प्रभावित करता है। तेरापंथ युवक परिषद ने जप अनुष्ठान कर स्वयं के आत्मकल्याण के साथ कितने कितने व्यक्तियों के पवित्र जीवन में निमित्त बना है। श्रीमती मंजू जैन ने पैंसठ दिनों का एकासन कर खाद्य संयम का परिचय दिया है। परिवार में धर्म के अच्छे संस्कार है।तप तभी होता है जब धर्म के प्रति रुचि हो, श्रद्धा हो।जप- तप कर्म निर्जरा का सुंदर माध्यम है। जप-तप का लाभ कभी खाली नहीं जाता है।


मुनि कुमुद कुमार जी ने कहा – प्रत्येक धर्म में साधना का विधान है। जैन धर्म में साधना के विभिन्न प्रकार है लेकिन उद्देश्य एक ही होता है कर्मनिर्जरा । जप में खपना होता है तो तप में तपना होता है। भाव क्रिया से की गई जप तप आराधना ही सिद्धि तक पहुंचाती है। जप- तप से हमारा कर्म शरीर प्रभावित होता है। आराधना के साथ मन का एकाग्र होना जरूरी है। आत्मशुद्धि के साथ जप से मनशुद्धि एवं तप से तनशुद्धि होती है। कर्म निर्जरा के साथ शरीर का स्वास्थ्य भी ठीक होता है। जप साधना अनुष्ठान से देवता प्रभावित होते हैं ‌ ऋषि मुनियों ने जप तप कर हमारी संस्कृति को प्राणवान बनाया है। तेरापंथ युवक परिषद द्वारा समय -समय पर आध्यात्मिक प्रवृत्ति करना जागृत समाज का सूचक है। युवाशक्ति का धर्म से जुड़ाव अनुकरणीय है। मीडिया प्रभारी अविनाश जैन ने बताया – तेरापंथ युवक परिषद द्वारा दो दिन जप अनुष्ठान का आयोजन हुआ। अनेक युवकों ने जप के साथ तपाराधना की। परिषद उपाध्यक्ष दीपक जैन ने जप साधकों का आभार व्यक्त किया।

Sunil Kumar Dhangadamajhi

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