सैकड़ो पुरानी परंपरा, इस दिन बीज का बड़ा महत्व
देवभोग: गरियाबंद जिला में ग्रामीण परंपरा और मान्यताओं से ऐसे कई तीज त्योहार मनाए जाते हैं जिसके पीछे एक खास महत्व भी छुपा होता है। पूरे भारतवर्ष में अक्षय तृतीया का त्यौहार मनाया गया है। इस दौरान जिले के देवभोग विकासखंड है के अंतर्गत ग्राम पंचायत डूमरबाहाल में अक्षय तृतीया के मौके पर सदियों से चली आ रही है पुरानी परंपरा का पालन करते हुए इस बार भी बिहान छीना कार्यक्रम को संपन्न किया गया ।

कहा जाता है कि इस दिन ग्रामीण किसान अपने गांव के प्रमुख देवी देवताओं की पूजा आराधना के साथ ही गांव के गोटिया या झांकर के हाथ से देवी को समर्पण पंच तत्व को साक्षी मानकर किसानों को बीज सौंपा जाता है। यह बीज की काफी महत्व होता है। इस बीज से किसान आगामी खरीफ फसलों की तैयारी करता है। धान बोने से पूर्व होने बोने वाले धान पर यहां से मिला हुआ बीच को मिश्रण करते हुए बीज बुवाई का काम को शुभारंभ करते हैं। यह सदियों से चली आ रही परंपरा है। लोगों की आस्था है, जो अपने इष्ट देवी देवताओं के साथ-साथ पारंपरिक खेती को भी दर्शाता है

ग्राम पंचायत डूमरबाहाल के हरिसिंह ध्रुवा गाँव के पुजारी, गोंहटिया एवं वर्तमान सरपंच भी है जिनके मार्गदर्शन पर ग्रामीण किसानों की बिहान छीना कार्यक्रम को भली-भांति संपन्न किया गया। अक्षय तृतीया के मौके पर किसान वर्षों से इंतजार कर रहे होते हैं कि कब अक्षय तृतीया पर उन्हें अपने देवी देवताओं को दर्शन करने का मौका मिलेंगे। साथ ही अक्षय तृतीया पर नए फसल के लिए बीज वितरण भी किया जाता है। तभी किसान अपने खेतों पर फसल बो सकता है। ऐसी मान्यता कई वर्षों से चली आ रही है। जो आज भी विद्वान है। आज इस परंपरा को निभाते हुए ग्राम पंचायत डूमरबाहाल के कई किसान व ग्रामीण वार्षिक इस त्यौहार को सात्विक ढंग से मना कर अपने परम इष्ट देवी देवताओं की दर्शन के साथ में खुशी जाहिर की कि आगामी खरीफ के समय में फसल अच्छी होगी।
देवभोग से रमेश निषाद की रिपोर्ट Yadu News Nation
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