कटिहार (बर्धमान जैन): मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में श्रीमती संगीता पटावरी के मासखमण तप अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा- चातुर्मास में तपस्या का क्रम निरंतर प्रवर्धमान है।तप करना सहज सरल नहीं है। अपने आप में कर्म निर्जरा का साधन है तपस्या। एक पूर्ण उपवास से एक हजार वर्ष के नरक का आयुष्य कम हो जाता है।मासखमण से कितने कितने कर्म कट जाते है। जीवन में कितने-कितने पाप कर्म करते रहते है।वे कर्म तपस्या से कटते रहते हैं।तप, धर्म, ध्यान से पाप कर्म हल्के होते है। भगवान महावीर स्वामी के समय धन्ना अनगार सबसे बड़े तपस्वी संत थे। तपस्या के साथ आध्यात्मिक मंत्रजप,लोगस्स का जप अवश्य करना चाहिए। कायोत्सर्ग का प्रयोग भी करना चाहिए। संगीता पटावरी ने मनोबल को मजबूत बनाया है।आज एक साथ तीन तीन तपस्या का अभिनंदन किया जा रहा है। तपस्या दृढ़ मनोबल से होती है। हमें हमेशा मन में यही भाव रखना चाहिए कि देव, गुरु, धर्म की कृपा से ही सब कुछ हो रहा है।
मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा- कटिहार तपहार बन गया। छोटे से क्षेत्र में चातुर्मास में तीन मासखमण एवं अनेकों तपस्या कटिहार श्रावक समाज की तप भावना को दर्शाता है। हम अपने कषाय को पतला करें। तप करने वाला कितने कितने व्यक्तियों की निर्जरा में निर्मित बनता है।तप के कारण कितने व्यक्ति धर्म के साथ जुड़ जाते है।
हनुमान नाहटा ने बताया – श्रीमती वंदना नाहटा ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया। साध्वी प्रमुखा विश्रुतविभा जी के संदेश का वाचन मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने किया।सभा अध्यक्ष विमल बैंगाणी, तेरापंथ युवक परिषद अध्यक्ष मनीष नाहटा, महिला मंडल मंत्री श्रीमती सुमन पुगलिया, नेपाल बिहार सभा अध्यक्ष विरेंद्र संचेती, निशा पटावरी, विवेक पटावरी,नीतू डोसी, कांता दफ्तरी,पटावरी परिवार ने वक्तव्य एवं गीत प्रस्तुत किया।सभा द्वारा प्रदत्त प्रशस्ति पत्र का वाचन सभा मंत्री राजकुमार पुगलिया ने किया।सभा, महिला मंडल, तेरापंथ युवक परिषद द्वारा प्रशस्ति पत्र एवं साहित्य से तपस्वी संगीता पटावरी का अभिनंदन किया गया। राजेश पटावरी श्रीमती सुषमा पटावरी का साहित्य द्वारा अभिनंदन किया गया।कार्यक्रम का कुशल संचालन मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने किया।

