अपने जीवन को संयमित बनाएं -मुनि प्रशांत
कटिहार (बर्धमान जैन): मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में तेरापंथ महिला मंडल कटिहार द्वारा विवेक ही धर्म है प्रतियोगिता आयोजित की गई। जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा- जयणा- यतना साधु एवं श्रावक दोनों के जीवन में अपेक्षित है। ये जागरुकता का भाव आना फिर क्रिया में जुड़ जाना साधक के लिए बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। किसी भी प्रकार का कार्य करते समय यह चिंतन रहे कि जीव हिंसा से कैसे बचें ? अप्रमत्तता का भाव व्यक्ति के वर्तमान एवं भविष्य दोनों को पाप से बचाता है। अप्रमत्तता के कारण कितनी-कितनी समस्या आती ही नहीं है।कितनी ही समस्याओं का समाधान शीध्र मिल जाता।हम अपने आप में जागरूकता का जीवन जिएं। ये प्रतियोगिता ज्ञानवर्धक होने के साथ साथ व्यवहारिक जीवन में बहुत उपयोगी है।हम अपने जीवन को संयमित बनाने का प्रयास करें। एक गृहस्थ व्यक्ति पारिवारिक सामाजिक कर्तव्य का पालन करता हुआ भीतर से सजग रहें। नम्रता भंसाली ने प्रश्नों को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत कर अपने परिश्रम को सार्थक किया है।

मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – हमें ज्ञान को सिर्फ जानना या मानना नहीं है। जीवन व्यवहार में काम में लेना है। प्रभु महावीर ने फरमाया विवेक ही धर्म है। अखिल भारतीय महिला मंडल ने एक सुंदर उपक्रम भारत वर्ष में चलाया विवेक ही धर्म है।प्रमाद हो जाने पर सबसे पहले हमारे भीतर पश्चाताप का भाव रहें। शीध्र ही उसका प्रायश्चित करके अपनी आत्मा को हलुकर्मी बनाएं। ये पापभीरुता का भाव साधक को अनन्त अनन्त कर्म से बचा लेता है। साधुवाद महिला मंडल को। महिला मंडल मंत्री सुमन पुगलिया ने बताया – महिला मंडल के मंगलाचरण से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। अध्यक्ष श्रीमती संगीता पटावरी ने विषय प्रस्तुति दी। आभार सहमंत्री श्रीमती खुशबू घोड़ावत ने किया। कार्यक्रम का कुशल संचालन श्रीमती नम्रता भंसाली ने किया।

