अट्ठाई की तपस्या का प्रत्याख्यान
कटिहार (बर्धमान जैन): मुनिश्री प्रशांत कुमारजी मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में श्रीमती सिम्मी बैंगाणी का तपाभिनंदन समारोह आयोजित हुआ जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – तपस्या करना सरल काम नही है। जहां मन कमजोर होता है वहां काम नहीं होता है। सिम्मी ने निश्चय कर लिया और मनोबल से उसे पूरा निभा भी लिया। अच्छी बात है जीवन में पहली बार तपस्या कर गौरव बढ़ाया है। परिवार में खुशी का माहौल है। तपस्या की शक्ति बहुत बड़ी होती है। तपस्या करने वाला साधक न केवल तन को तपाता है अपितु अपने मन को भी वश में करता है।तप से सब अच्छा ही होता है। परिवार में पीहर में खुशी है कि यह धर्म में आगे बढ़ रही है। तपस्या करके स्वत: धर्म के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ऊंचे मनोबल से सारे काम पूर्ण होते है। बहुत बहुत साधुवाद।

मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा – गुरुदेव की कृपा से कटिहार में तपस्या का अच्छा क्रम चल रहा है। चातुर्मास की समाप्ति तक यहां तप की गंगा बहती रहनी चाहिए। ऋषभ बैंगाणी ने तप में साथ निभाया है। चातुर्मास का समय विशेष धर्माराधना का होता है।हनुमान नाहटा ने बताया – जितेश बैंगाणी, श्रेयांस खटेड़ ने विचार व्यक्त किए। सभा द्वारा साहित्य से सम्मानित किया गया।

