हमारा जीवन अन्य के लिए प्रेरक बनें -मुनि प्रशांत
कटिहार (बर्धमान जैन): मुनिश्री प्रशांत कुमारजी,मुनिश्री कुमुद कुमारजी के सान्निध्य में तपाभिनंदन समारोह आयोजित हुआ जनसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री प्रशांत कुमारजी ने कहा – चातुर्मास का समय धर्माराधना का होता है। अपनी अपनी योग्यता के अनुसार व्यक्ति धार्मिक तत्व की आराधना करते जाएं। तप से संकल्प की सिद्धि होती है। धार्मिक चेतना से व्यक्ति का जीवन यथार्थ का चिंतन करता है। चातुर्मास में विविध प्रकार से साधना आराधना करते जाएं। हमारा जीवन अन्य के लिए प्रेरक बनें।आज दो तपस्वी उपस्थित हुए है। अररिया कोर्ट से अनिता जी बेगवानी, तपस्विनी श्राविका है। सुकन्या कृतिका दुगड़ ने छोटी सी उम्र में तप करके सबके लिए प्रेरणा का कार्य किया है। दोनों की धार्मिक भावना उत्तरोत्तर बढ़ती रहें मंगलकामना। मुनिश्री कुमुद कुमारजी ने कहा जिनशासन में अनेकों तपस्वी साधक हुए हैं।दीर्घ तपस्या करके अपनी आत्मा का कल्याण किया है।महासती सुंदरी ने लगभग साढ हजार वर्ष तक आयम्बिल जैसा कठिन तप को तपा है। कर्म निर्जरा करते हुए जिनशासन की प्रभावना बढ़ाते रहें।

हनुमान नाहटा ने बताया – श्रीमती अनीता बेगवानी ने सोलह का प्रत्याख्यान किया। बाईस का भाव लिए हुए है। सुश्री कृतिका दुगड़ ने अट्ठाई का प्रत्याख्यान किया। संदीप दुगड़, अंकित बेगवानी, दुगड़ संचेती, सुराणा परिवार, महिला मंडल अध्यक्ष श्रीमती संगीता पटावरी ने तप अभिनंदन में विचार व्यक्त किए। सभा द्वारा साहित्य से सम्मानित किया गया।

