पढ़ने से होता ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय -मुनि प्रशांत
सिलीगुड़ी (वर्धमान जैन): मुनि श्री प्रशांत कुमार जी, मुनि श्री कुमुद कुमार जी के सान्निध्य में अखिल भारतीय तेरापंथ महिला मंडल द्वारा निर्देशित द पावर ऑफ रिडिंग कार्यशाला सिलीगुड़ी तेरापंथ महिला मंडल द्वारा आयोजित की गई। सभा को संबोधित करते हुए मुनि श्री प्रशांत कुमार जी ने कहा- महिला मंडल द्वारा कार्यशाला आयोजित हो रही है। पढ़ना कितना जरूरी है, क्योंकि पढ़ने से ज्ञान का विकास होता है। आगम में भी कहा गया है कि पढ़ने से ,स्वाध्याय करने से ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय होता है। जो व्यक्ति स्वयं नहीं पढता है एवं पढ़ने वाले को बाधक बनता है तो और ज्यादा ज्ञानावरणीय कर्म का बंधन हो जाता है। ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयोपशम होना जरूरी है। उसके लिए पढ़ना चाहिए जिससे स्मृति में भी ज्ञान रहता है, एवं ज्ञान का भी विकास होता है। सम्यक ज्ञान बढ़ना चाहिए। प्रतिदिन पढ़ना चाहिए। सफल होने के लिए सम्यक ज्ञान होना जरूरी है। अज्ञान असफलता की ओर ले जाता है। अपने ज्ञान को परिपक्व बनाएं। मिथ्या ज्ञान स्वयं के भटकाव के साथ-साथ कितने-कितने को भटका देता है। कभी-कभी आत्मज्ञान के बारे में भी जानना चाहिए। मैं क्या कर रहा हूं ? मेरी क्या गति होगी ? मुझे जीवन में क्या करना चाहिए ? व्यक्ति अपने भीतर की चेतना को जागृत करें। बाह्य ज्ञान से विशेष लाभ नहीं होता है। धार्मिक साहित्य आगम ज्ञान से सकारात्मक वातावरण बनता है। जैन धर्म ज्ञान का भंडार है। अनेक विद्या,ज्ञान से भावित है आगम ग्रंथ। पढ़ने से अपनी शक्ति बढ़ती है।नकारात्मक शक्ति कम हो जाती है। बेकार का साहित्य पढ़ने से बचना चाहिए । सम्यक ज्ञान को पढ़ने की आदत डालनी चाहिए। अनुप्रेक्षा करनी चाहिए। आत्मा का पाॅवर बढ़ेगा तो जीवन में आनंद ही आनंद होग।

मुनि श्री कुमुद कुमार जी ने कहा-जीवन में ज्ञान का विकास होना बहुत जरुरी है, लेकिन ज्ञान वह होना चाहिए जिससे जीवन का सम्यक विकास हो सके। आदत, व्यवहार, चिंतन, आचरण में परिवर्तन आए। सम्यक ज्ञान को पढ़ते रहे। वर्तमान समय में ज्ञान का विकास हुआ। डिग्रियां बहुत प्राप्त कर लेते हैं लेकिन जीवन में बदलाव नहीं आता। गलत प्रवृत्ति की ओर चले जाते हैं तो ज्ञान भारभूत बन जाता है। पढ़ने के साथ-साथ चिंतन- मनन अवश्य होना चाहिए। सप्ताह में एक दिन व्यक्ति अपने आप की रीडिंग करता रहे, तो स्वयं की आत्म समीक्षा हो जाती है। पढ़ने से कर्म निर्जरा एवं ज्ञानावरणीय कर्म का क्षय हो जाता है।केवल ज्ञान की प्राप्ति करके अनंत ज्ञान से हम संपन्न बने। महिला मण्डल के मंगलाचरण से कार्यशाला का शुभारंभ हुआ। विषय प्रस्तुति श्रीमती मंजू बैद ने दी। आभार श्रीमती वर्षा छाजेड़ ने व्यक्त किया। कार्यशाला का संचालन श्रीमती सुमन बोथरा ने किया।

